शीला के कदम जैसे हवा मे उड़ रहे थे.प्रशासन ने उसकी उम्र क़ैद की सज़ा 14 साल से घटा कर 10 साल कर दी थी -उसके अच्छे आचरण की वजह से. जैलर साहब को बड़ी आत्मीयता थी शीला से. सुघड़ सुशील सुशीला देवी, मे सब उन्हे प्यार से शीला माई कहते थे,सबका दुख दर्द बाँचती माई और उनके शब्द जैसे मरहम का काम करते दुख़्ते दिलो पर. सज़ा कम होने की खबर उसने घर जेल मे नही भिजवाई थी ,सोचा खुद जाकर सबको हैरान कर देंगी. कितने बड़े हो गये होंगे मेरे बिट्टू और गुड़िया ,25 और 21 बरस के.15 बरस का था जब वो भयानक घटना हुई थी…बस, अब कभी नही याद करेंगे वो दिन…..
जेलर साहब ने पूछा था “माई कहाँ जाओगी,कितने बरस हुए कोई मिलने भी नही आया आपके घर से,मेरा दोस्त एक वृधाश्रम चलाता है ,उसको भी आपसे सहारा हो जाएगा और आपको उसकी संस्था से .”नही नही,’ तुरंत बोली थी माई .मेरे पति और बच्चे मेरा इंतज़ार करते होंगे, मैने ही उन्हे यहाँ आने को मना किया था अब तक.. अब मैं घर जाऊंगी बिजनौर ,मुझे देख कर सब बहुत खुश होंगे. मैं चलती हूँ “. जेलर ने शीला का सामान और पैसे दिए और शीला रेलवे स्टेशन की तरफ चल दी.
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जोधपुर से बिजनौर पहुँचने मे शीला को रात हो गयी थी. सर्दियो के दिन थे और छोटा कस्बा था ,लोग जल्दी अपने घर वापस आ कर सो जाते थे.
आदमी दुनिया के किसी भी कोने कितने बरस तक क्यूँ ना रह ले , अपने घर की पहचान नही भूलता .लखनऊ शहर इन दस बरसो मे कितना बदल गया था ,सड़क पर गाड़ी ज़्यादा और सड़क पार मकान और भी घने. बिजनौर भी बदला सा लगता था .टांगे नही थे सड़को पर आटो ज़्यादा थे या साइकल रिक्शा ,और ढेर सारी नये तरीके की गाड़िया .घबराते हुए शीला ने अपनी गली मे प्रवेश किया. 45 बरस की शीला 20 बरस की लड़की की तरह लजा रही थी, बिट्टू के पापा कैसे होंगे, इतने बरस मेरी सुध नही ली पर मुझे याद तो करते होंगे,अरे मैंने ही तो मना किया था उन्हें मुझे न मिलने के लिए ,मुझे ज़रूर याद करते होंगे ,सोचते सोचते कब घर के किवाड़ तक पहुँच गयी,उसे गुमान नही हुआ.
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किवाड़ पर चटकनी देर तक बजाती रही पर अंदर से कोई नही आया, ऐसा लगा की जैसे अंदर गाने बजाना हो रहा है. रविवार है, बच्चे शायद टीवी देख रहे हो. फिर नज़र दरवाज़े की साइड की दीवार पर पड़ी. मेरे हाथो के निशान होंगे,बिट्टू के पापा सफेदी करवाते पर मेरे निशान हमेशा वही रहते, उसे दिन से जिस दिन से हम इस नये घर मे आए थे, बिट्टू के पैदा होने के बाद. हथेली के निशान थे पर हाथ बेगाने लगते थे ,गुडिया के हाथ ? .तभि किसी ने दरवाज़ा खोला. शीला ने घूँघट कर लिया ,अगर बिट्टू के पापा हुए तो….
“जी ,आप….” कोई 22 -23 वर्ष की नयी नवेली दुल्हन दिखती थी .”बिट्टू है क्या… शीला हौले से बोली . अंदर गाना बजाना ही चल रहा था . ” मैं, बेटी…” इससे पहले पूरा कर पाती एक रोबिली आवाज़ आवाज़ पीछे से आई “कौन है कविता ?” ,जी कपिल कोई आपको पूछ रही है . बिट्टू शीला की झलक देख कर जड़ सा हो गया …”आप “..फिर अपने को संभालता हुआ बोला ,”ठीक है कविता, तुम अंदर महमानो को देखो,मैं मिल लेता हूँ “.
शीला को कुछ समझ नहीं आ रहा था पर बिट्टू को देख उसकी ममता उमड़ी जा रही थी .
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बिट्टू उन्हे दीवान खाने मे ले गया .” मा …”बिट्टू शीला के गले मिल गया .दोनो की आँखो से आँसू रुकने का नाम नही ले रहे थे.” मा. आप यहा,अभी तो चार साल और … जल्दी,कैसे….”"बेटा, सरकार ने मेरी सज़ा कम कर दी ,मैने सोचा मैं तुम्हे सर्प्राइज़ दूँगी ….लगता है ,तुम मुझे देख कर जैसे परेशान ….” बोलते बोलते शीला की ज़ुबान रुक गयी. सामने दीवार पर उसकी तस्वीर टंगी थी और उस पर फूलों का हार पड़ा हुआ था . ” बिट्टू, ये……”
फिर बगल मे देखा की बिट्टू के पापा की तस्वीर पर भी हार था ….शीला मूर्छित हो कर गिर पड़ी. बिट्टू ने पानी के छींट मार कर उन्हे जगाया …”मा,तुम ठीक तो हो
..”"बिट्टू,पापा,कब, कैसे ….और मेरी तस्वीर पर …क्यूँ बेटा ?”.शीला का दिल फटा जा रहा था.
बिट्टू सोफे पर बैठ गया और धीरे से बोला ” पापा का देहांत पिछले साल हुआ ,वो आपको भुला नही पाए और सारी उम्र अपने आपको उस घटना का ज़िम्मेवार मानते रहे ,कभी माफ़ नहीं कर पाए अपने आप को ..हमेशा कहते काश मैंने शीला की बात सुनी होती, काश हम जोधपुर न जाते …एक दिन ऐसा नहीं गया माँ जब पापा ने आपको याद न किया हो ,आपकी याद के सहारे हम इतने बड़े हो पाए …दिल का दौरा पड़ा था उन्हे ,पहला और आख़िरी. सॉरी मा, पापा ने माना किया था आपको बताने को.
“ओह ओह बिट्टू …”शीला बहुत देर तक सुन्न बैठी रही .
“और वो हार मेरी फोटो पर …”
बिट्टू और शीला ने ध्यान नही दिया पर दरवाज़े पर खड़ी कविता ने उनकी सारी बाते सुन ली थी .
“कविता ,आओ …” कविता की आँखो मे बहुत सवाल थे ,और शीला की भी .
मा, कविता और मैं कॉलेज मे साथ थे,पिछले साल हमारी शादी हुई,पापा के गुज़रने से दो महीने पहले….”
कविता,तुम ने सब सुन लिया है और तुम्हारे लिए ये भी जानना ज़रूरी है ..
बिट्टू ने बताना शुरू किया ” करीबन 10 साल पहले की बात है .हम पापा के दोस्त यादव के यहा जोधपुर गये थे छुट्टियों मे और वही वो हादसा हुआ था .मा ने पापा को कितनी बार कहा था कि यादव ठीक आदमी नही लगता पर पापा ने आपकी कभी नही सुनी .पापा को लगता कितना अमीर आदमी है और उन्हें अपना दोस्त मानता है .घर आता तो हमारे लिए खिलोने और मिठाई लता ,गुडिया को गोद में बिठा कर कहानिया सुनाता ,पार्क घुमाने ले जाता .पापा को बहुत गर्व था का वो उनका दोस्त था . गर्मियों कि छुट्टिया थी और यादव ने हमें अपनी पुश्तैनी हवेली में रहने के लिए निमंत्रण दिया था .माँ ने कितना समझाया , कितना मन किया पर पापा नहीं माने . और एक रात, पापा को शिकार के बहाने जंगल भेज कर उस जंगली आदमी ने माँ के साथ दुर्व्यवहार करने कि कोशिश की.उस रात पापा की गैर मौजूदगी मे यादव के दुर्व्यवहार करने की कोशिश को नाकाम करते और अपनी इज़्ज़त बचाते मा उसे छत से धक्का दे दिया था और छत से गिर कर उसकी मौत हो गयी थी .और जब तक पापा वापस आते, हमारी दुनिया बदल गयी थी .
यादव का परिवार के सियासती रिश्ते थे,उन्होने माँ को उम्र क़ैद करवा दी . पिता जी को हमारे भविष्य की चिंता थी ,इसीलिए उन्होने सोच समझ के यह फ़ैसला किया उन्हें लगा माँ भी शायद यही चाहती की इस घटना का साया उनके बच्चो के जीवन पर न पड़े .गुडिया बहुत छोटी थी, उसको बोला की माँ भगवान् के पास चली गयी है पर मैं ,सब से यह कह दिया कि उदयपुर मे एक नौका उलट गयी थी और मा डूबने वालो मे से एक थी .हमने बहुत खोजा पर मा का शरीर नही मिला . एक ऐसा हादसा उन दीनो हुआ था और लोगो को विश्वास हो गया कि माँ अब नहीं रही…..
मैंने कैसे ये दस साल निकाले, मुझे पता है ….पापा और मैंने सोचा था की माँ के जेल से छूटने से पहले उन से मिल कर सब बता देंगे और हम लोग कहीं नयी जगह फिर से ज़िन्दगी शुरू करेंगे, समय रहते मैं तुम्हे भी सब बता देता , पर…आज ,अचानक माँ यहाँ आई ……माँ , आपको ये तो नहीं लगा की हम आपको भूल गए ….वापस आ कर ..
“बोलो माँ ,माँ ,क्या पिताजी ने ग़लत किया ?”
‘बिट्टू बहुत जज़्बाती हो गया था .
“पर माँ, अब हम लोगो को कुछ भी कह देंगे, बस अब आप यही रहो,कुछ ना कुछ कहानी बना लेंगे ..”
कविता बोली “.और पाँच दिन मे गुड़िया की शादी है, उसके ससुरालवाले .
“गुड़िया की शादी …??”
“हा मा, लड़का इंजईनिएर् है,खुद माँग के लिया है रिश्ता …अब आपके आशीर्वाद से शादी संपूर्ण होगी .
कविता फ़ौरन बोल पड़ी “नही, नही ,कपिल ऐसे कैसे ..पर खून तो खून है कपिल, अगर लोगो को पता चल गया तो लोग क्या कहेंगे ,समाज को क्या जवाब देंगे..एक खूनी…..”
बिट्टू आकर कविता के सामने आ कर खडा हो गया और कविता की आँख मे आँख मिला कर बोला “तो फिर हमे अलग हो जाना चाहीए क्यूंकी खूनी तो…”
शीला ने बिट्टू का हाथ पकड़ लिया “नही बिट्टू, एक शब्द नही बेटा …”
नही मा, कहने दो…..सुनो कविता, यादव को छत से धक्का मैने दिया था ,उसकी हिम्मत कैसे हुई मेरी छोटी बहन को अकेले छत पर ले जाने की, उसको हाथ लगाने की न जाने कबसे वो कविता….गुडिया को …ऐसे…..,मेरी देवी सरीखी मा ने इल्ज़ाम अपने सर ले लिया और तुम कहती हो कि माँ को घर से ..कैसे …और क्यूँ ……. मैं अब तक अपने आप को माफ़ नही कर पाया हूँ “.
कविता शीला के पाँव पर गिर पड़ी ” माँ,मुझे माफ़…..आपने इतना बड़ा त्याग किया और मैं कितनी सेल्फिश बन रही थी ….”
नही बेटा ,उठो, शीला ने कविता को गले लगा लिया …तुम्हारी बात ठीक है ,मेरा जीवन गुज़र गया .मैं नही चाहती कि मेरे बीते हुए कल की परछाई तुम्हारे आने वाले कल पर पड़े. बस तुम लोगो को देख लिया ,तुम खुश हाल हो ,मुझे बस ये देख कर तस्सली हो गयी.गुडिया भी अपने घर चली जायेगी ,मुझे इस से ज्यादा क्या क्या चाहिए .
और बिट्टू, तेरे पापा ने कुछ गलत नहीं किया ,मैं भी यही चाहती के मेरे बच्चो के जीवन पर कोई दाग न आये .
मैं सुबह की गाड़ी से चली जाओंगी,बस अपनी गुड्डो से मिल लू आज रात ….
“नही माँ ,आप यही रॅहॉगी ” बिट्टू बोला.
नही बेटा, जेलर साहब ने लखनऊ के एक वृधाश्रम का पता दिया था, उन लोगो को मेरी ज़रूरत है,और मेरे मन को भी शांति मिलेगी ,तुम्हारे पापा के बिना..मैं… बस उन लोगो कि खुशियों में अपना मोक्ष दूंढ़ लूंगी… .और तुम्हारे पास मेरा पता होगा ,जब मन् करेगा तो मुझसे मिलने वह आ जाना .”
शीला की आवाज़ में दृदृढ़ता थी.
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गुडिया को माँ को देख कर अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ.माँ ये तुम हो…..सच…उसको विश्वास नहीं हो रहा था. बिट्टू ने गुडिया को सारी कहानी सुनाई .
रात मे गुड़िया और शीला बहुत रोए और फिर दोनो ने जी भर के बाते की.दस साल के रिश्ते उन पांच घंटो में जी लिए.
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पौ फटने से पहले ही शीला बिट्टू के साथ स्टेशन चल पड़ी .कविता और गुडिया ने आंसू भरी आँखों से उसे विदा किया .उन्हें गर्व था अपनी माँ पर .
सुबह कि पहली किरण के साथ शीला के नए जीवन का सूर्य उदय हो रहा था….एक नयी उजाले की किरण के ऑर,एक नया आशियाना बसाने . …….
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