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नया साल?

  बरसों से साल की शुरुवात एक कविता लिख कर करती हूँ. पिछले नए साल पर ये लिखा था, पर जवाब मिले नहीं अभी तक. सवाल बन कुछ इस तरह ज़हन में अटके पड़े हैं : क्या फिर वही होंगे … पढना जारी रखे

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फ़ुर्सत – रविवार

फ़ुर्सत ने दस्तक दी आज रविवार के दिन पुरानी यादो का बस्ता बोझे मे था लाया बुझे लम्हो की धूल हटा के अन्दर झान्का हमारे रिश्ते का बहिखाता पहले हाथ आया पुरानी आदत है हिसाब शुरु से बान्चती हू मै … पढना जारी रखे

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