Tag Archives: Poetry

दो दशक

हम मिले ज़िन्दगी के उस मोड़ पर फिर से,
जहाँ तुम उतने ही साधारण थे जितनी की मैं ,
एक मार्गदर्शक, एक हमसफ़र के चेहरों से छुपे,
अपने आगे अपनो के सुख दुःख को जीते हुए। पढना जारी रखे

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नेता जी कहैं

प्रेस  के कैमरों की चुंधियाती रौशनी में, बंद आँखें एडजस्ट करते नेताजी बोले – “कम सवाल करना इंसानियत के नाते , मन व्यथित है आज, शब्द मौन है सारे। ” दुखद खबर है फिर सूखा पडा देहात में, पीने को … पढना जारी रखे

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क्यू न कभी ऐसा हो,बोलो

क्यू न कभी ऐसा हो,बोलो मन्नू मै बेवजह गर रूठ जाऊ तुमसे जान बेवजह फ़िर भी मना लो तुम बेबात बेकरारी चुभती है दिल मे क्यू न कभी ऐसा हो,बोलो मन्नू मै गर बेबात जो सताऊ कभी तुम हाथ पकड … पढना जारी रखे

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गुज़रा साल और तुम

तेरे आज और कल के दरमियान, एक सदी गुज़र गयी एक साल मे. खोल कर मुट्ठी झान्क कर देख, पिघला दिल सोया है किस हाल मे. जिसकी याद मे ठोकरे खायी है, खुद से खुद का हाल छुपाते. रुक कर … पढना जारी रखे

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कटी पतन्ग है तू

तेरे वादे तुझसे झूठे निकले आस्मा क्यू तुझसे प्यार करे कटी पतन्ग है तू लापरवाह हवा का रुख क्या इन्तज़ार करे बादल की हो पवन बसन्ती इठलाए,गगन भी आह भरे बरस गया गर आस्मा रो कर तेरी हस्ती को मिटा … पढना जारी रखे

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फ़ुर्सत – रविवार

फ़ुर्सत ने दस्तक दी आज रविवार के दिन पुरानी यादो का बस्ता बोझे मे था लाया बुझे लम्हो की धूल हटा के अन्दर झान्का हमारे रिश्ते का बहिखाता पहले हाथ आया पुरानी आदत है हिसाब शुरु से बान्चती हू मै … पढना जारी रखे

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एक गुलाबी चश्मा

अपने अन्तहीन सवालो के जन्गल से जब कभी बाहर निकलोगी तुम सोना देखोगी खयालो के दलदल मे फ़न्सी कितनी पीछे छोड आयी हो खुशी को इतनी बेरन्गी नही है दुनिया तुम्हारी जितनी तुम समझती आयी हो सोना वक़्ती तूफ़ान से … पढना जारी रखे

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