Tag Archives: Poem

दो दशक

हम मिले ज़िन्दगी के उस मोड़ पर फिर से,
जहाँ तुम उतने ही साधारण थे जितनी की मैं ,
एक मार्गदर्शक, एक हमसफ़र के चेहरों से छुपे,
अपने आगे अपनो के सुख दुःख को जीते हुए। पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , | टिप्पणी करे

फ़टी पहरन

दिखाई न दू ज़माने भर को कभी भी सोना कोई जादुई तरक़ीब तुम मुझे सिखा दो ना दिन भर ज़माने मे जहा से भी गुज़रती हू भूखी नज़रे मेरे तन से लिपट साथ आती है रोज़ दागदार कर देती है … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , | टिप्पणी करे

आइना

मेरे आईने को एक नयी तकलीफ़ लग आयी है, मेरे चहरे का मुआयना करने की ज़िद्द लगायी है. कल शिकायत थी बालो मे क्यू चान्दी उतर आयी, आज बोला कौव्वे उग रहे है आन्खो के कोनो पर, हद्द कर दी … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , | 6 टिप्पणियाँ

वजूद

वजूद चलते रहना तेरी फितरत में है ये जानती हूँ मैं जानम कबसे फिर भी साया बन चल पड़ती हूँ तेरी बेरुखी की धूप के पीछे पीछे तपिश में झुलस कर रुसवाईयो की तेरी बे इनायती से बेजार हो रही … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , , , , | 5 टिप्पणियाँ

एक अजनबी की तरह

अपने ही शहर मे आये है एक अजनबी की तरह दबे कदमो का बोझा लिये तेरी आहट ने भी पराया कर दिया था यहा हमको तू वो रहनुमा नही जिसे मेरी निगाह तलाशे सदा फिर क्यू दोबारा तेरी ही चौखट … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , | 4 टिप्पणियाँ

यू टर्न

Reposting An Old Poem यू टर्न हर क़दम संभल के रखो हर हरफ़ वज़न कर कहो कल् क्या पता हो न हो लाइफ में यू- टर्न नही है ….. हर रिश्ता खुल के जियो शक को जगह कोई न दो … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , | 1 टिप्पणी