दो दशक

हम मिले ज़िन्दगी के उस मोड़ पर फिर से,
जहाँ तुम उतने ही साधारण थे जितनी की मैं ,
एक मार्गदर्शक, एक हमसफ़र के चेहरों से छुपे,
अपने आगे अपनो के सुख दुःख को जीते हुए।

ये अच्छा हुआ कि हम मिले फिर से ,
सदियों बाद ही सही पर मिले तो सही ।
वक़्त की धूल से परे था जो रिश्ता ,
वक़्त देकर उसे नया रंग दिया तो सही।

हाँ , वैसे नहीं जैसे मिला करते थे पहले,
दो दोस्तो की तरह ,बस- मैं और तुम,
अपने दायरों में ज़िन्दगी के मायने तलाशते ,
जिनका कोई माझी न था, न मानी था कोई.

हम मिले ज़िन्दगी के उस मोड़ पर फिर से,
जहाँ तुम उतने ही साधारण थे जितनी की मैं ,
एक मार्गदर्शक, एक हमसफ़र के चेहरों से छुपे,
अपने आगे अपनो के सुख दुःख को जीते हुए।

तुम्हारी खामोश बेचैनी आज भी बोलती है,
मेरे सतही शब्दों में सागर खोज लेते हो तुम ।
तुम्हारे साथ मैं फिर सत्रह की बन जाती हूँ,
वक़्त की शाख गिरने से रोक लेते हो तुम.

वो तूफ़ान तुम्हारे चेहरे के पीछे देखा था पहले,
धीमे धीमे आज भी वो दरिया बन के बहता है.
जो मेरे अनगिनत सवालों से गुज़रा था कभी.
वो उफान सोयी ज्वालामुखी बन धधक रहा है।

 

फ़टी पहरन

दिखाई न दू ज़माने भर को कभी भी सोना
कोई जादुई तरक़ीब तुम मुझे सिखा दो ना

दिन भर ज़माने मे जहा से भी गुज़रती हू
भूखी नज़रे मेरे तन से लिपट साथ आती है

रोज़ दागदार कर देती है मेरा कोरा दामन
रोज़ रगड वहशियत तन को छील जाती है

छाले पड गये है मेरे अस्तित्व के दामन पर
बेबस असमत त्राह त्राह कर ज़ार ज़ार रोती है

हया के नक़ाब के पीछे छुप कभी जाऊ अगर
वहशी नज़रे आन्खो से मन्न को कुतर जाएगी

कुछ तो करना होगा कुछ कर गुज़रना होगा
ज़ुल्म और बेबसी कुचल खुद आगे बडना होगा

जीना होगा साथ इनके,साथ जी के मरना होगा
डर से निडर हो कर, सबल बनके चलना होगा

सर ऊठा कर अपने स्वाभिमान का मान रक्ख
तार तार हुई फ़टी पहरन को रोज़ बदलना होगा

आइना

मेरे आईने को एक नयी तकलीफ़ लग आयी है,
मेरे चहरे का मुआयना करने की ज़िद्द लगायी है.

कल शिकायत थी बालो मे क्यू चान्दी उतर आयी,
आज बोला कौव्वे उग रहे है आन्खो के कोनो पर,
हद्द कर दी कम्बख्त ने जब बिन्दी माथे पे सजायी,
बोला हया लाल रन्ग बन माथे पे क्यू सिमट आयी.

सोया करो रातो मे झिड्क रहा है कुछ रोज़ से,
तुम्हारी अलसायी आन्खे मुझे धुन्धली दिखती है,
काजल को कोसती हो क्यू जो फ़ैलता जाता है,.
गलती है तुम्हारी जो नीन्दे पल्को पे सिसकती है

किसी पुराने प्रेमी सा बावरा मेरा आइना लगता है,
मुझ से शुरु होकर मुझ पर खत्म दायरा उसका है,
कभी सुन्दर भी बोलो हन्सते मैने प्यार से डान्टा,
मासूमियत से कल का चेहरा बस्ते से उसने छान्टा.

खुद से दोस्ती जो तुम कुछ बरसो पहले कर लेती,
ये चहरा जिला देती रोज़ नयी नज़्म मुझसे सुनती,
आईना मुझ से मेरी पहली सी सूरत मान्ग रहा था ,

क्या कुफ़्र करता था वक़्त की रेत को साल रहा था.

गुज़रा वक़्त फ़िसलती रेत है क्या ये नही जानता,
कल मे सिमटा चहरा दोबारा आईना नही मान्गता.

वजूद

वजूद

चलते रहना तेरी फितरत में है
ये जानती हूँ मैं जानम कबसे
फिर भी साया बन चल पड़ती हूँ
तेरी बेरुखी की धूप के पीछे पीछे

तपिश में झुलस कर रुसवाईयो की
तेरी बे इनायती से बेजार हो रही हूँ
दिल-ऐ-बेदर्द से शिकवा कर के देखो
टूटे अरमानो का बाज़ार बन गयी हूँ

कभी तुम बे आदतन रुख से पलट जाओ
वक़्त की रेत पर लिखे कल पे पड़ लेना
बीते लम्हो की सीली रेखाए नज़र आएँगी
मेरी वफ़ा की याद तेरे वजूद को सताएंगी

तेरे वजूद से खुद को जुदा करके जानम
सायो की दुनिया से रुखसत हो रही हूँ
तेरे खयालो की धुन्द में जो खो गया था
उस अक्स को पोशीदा से रिहा कर रही हूँ

तुझ को खो,खुद को पा ,अपनी बंदगी रही हूँ

एक अजनबी की तरह

अपने ही शहर मे आये है
एक अजनबी की तरह
दबे कदमो का बोझा लिये
तेरी आहट ने भी पराया
कर दिया था यहा हमको

तू वो रहनुमा नही जिसे
मेरी निगाह तलाशे सदा
फिर क्यू दोबारा तेरी ही
चौखट पे ला खडा कर
रुसवा कर दिया हमको

सान्से चलती है अबतक
राते देर तक सुलगती है
ये ज़िन्दगी शौक नही है
बुझता जुनून है अबतक
पर सर्द आहे बुझी नही है

सिर्फ़ यादो की राख है
नासूर बन के ज़िन्दा है ।

यू टर्न

Reposting An Old Poem

यू टर्न

हर क़दम संभल के रखो
हर हरफ़ वज़न कर कहो
कल् क्या पता हो न हो
लाइफ में यू- टर्न नही है …..

हर रिश्ता खुल के जियो
शक को जगह कोई न दो
जो कहना है आज कहो
कल की कोई शाख नही है ……..

नाराज़ हो कर तुम
दायरे समेट तो लो
पर दिल में दरिया रखो
हमदम खुदा तो नही है ……

तोड़ने से पहले कोई दिल
आयने में झाँक तो लो
जो रहता है उस पार वो
इतना भी पाक नही है …

चटक जाए रिश्ता कोई
फिर से जुड़ सकता है
झिर्रिया फिर भी दिखती है
गांठो में साख नही है ……

हर कदम संभल के रखो
हर हरफ वजन कर कहो
हर नाता प्रेम से बाँचो
की रिश्तो में आंच नही है ….

पल भर में बुझते है
सदियों में फ़ना होते है
नाज़ुक होते है बड़े रिश्ते
रिश्तो की शुरुवात यही है …..