Tag Archives: कविता

वजूद

वजूद चलते रहना तेरी फितरत में है ये जानती हूँ मैं जानम कबसे फिर भी साया बन चल पड़ती हूँ तेरी बेरुखी की धूप के पीछे पीछे तपिश में झुलस कर रुसवाईयो की तेरी बे इनायती से बेजार हो रही … पढना जारी रखे

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लो एक और् साल गुजर् गया

लो एक और् साल गुजर् गया जो गुजर् गया वो ख्वाब्  था जो सिमट् गया वो जुनून् था रिश्ते नये वो बना गया जख्मो की दवा दे गया लो एक् और् साल् गुजर् गया मिले राह् मे थे दिये कई … पढना जारी रखे

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कुछ तो हो जो ख़ास हो …

कुछ तो हो जो ख़ास हो मुझमे भी कोई बात हो दिलो को जो लुभा सके ऐसा कोई अंदाज़ हो यही चाहता है हर कोई की दो मुट्ठी आसमा हो इस जहाँ में ऐसा भी जिस पर उसका राज़ हो … पढना जारी रखे

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उजली किरण – एक लघु कथा

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आप कतार मे है

ट्रेन स्टेशन पर देखो तो खड़ी कतारे ऐसी लगती है ट्रैफिक लाइट पर ठहरी जेब्रा क्रॉसिंग की धारिया हो पाक सी ,सफ़ेद सी ,शांत सी ,नम सेज सी …. नौसिखिये गार्ड ,कान खुजाते ,अनमने ढंग से हुजूम को रोके लक्ष्मण … पढना जारी रखे

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तुमको इन्सान मानू

 ऊँचे नभ  मे उड़ती पतंग की शोखी  हर मन भाती है गिरते माँझे को संभाल लो तो तुझे इन्सान मानू उगते सूरज की हस्ती को झुक सलाम सब करते है डूबते सूरज को संभाल लो तो तुझे इन्सान मानू रंग बिरंगी महफ़िलो की हँसी सुहानी लगती … पढना जारी रखे

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कल रात भर……

सर्द मौसम से दामन बचाते गिलाफो में खुद को छुपाते काफ़ी की गरम चुस्की लगाते यूं ही अचानक… तेरी याद आ के सताती रही कल् रात भर…..   याद है तुमको, हॉस्टल की छत पर रिमझिम सौंधी हलकी बारिश में गर्म … पढना जारी रखे

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