Category Archives: त्रिवेणी

वक़्त 

दाँत काटी रोटी बाँटते थे जो कल तक मिल कर, आँख भर के अब एक दूसरे को देख नहीं सकते. कौन कहता है वक़्त के साथ नज़रिये नहीं बदलते.

त्रिवेणी में प्रकाशित किया गया | Tagged | टिप्पणी करे

त्रिवेणी

शीरा जुबान पे खंजर कमान में मुखौटे हसीं पर चेहरे बईमान से केकड़े है रेत के चलना संभाल के

त्रिवेणी में प्रकाशित किया गया | Tagged | 13 टिप्पणियाँ

कुछ त्रिवेनियाँ …….

धीमी सी हैं साँसें मेरीबहुत तेज़ पर रफ़्तार तेरी ए मौत तू जीतेगी जंग आज……************************************ख़रीद-ओ-फ़रोख़्त का बाज़ार है गरम साहिबहुस्न,इश्क़ और जज़्बात बहुत बिकते हैं यहाँ वफ़ा और क़ुर्बानी की क़ीमत पर है बहुत कम….*************************************जोड़ के रक्खा था जिसने सबकोतागा … पढना जारी रखे

त्रिवेणी में प्रकाशित किया गया | 5 टिप्पणियाँ