Category Archives: कविता

नया साल?

  बरसों से साल की शुरुवात एक कविता लिख कर करती हूँ. पिछले नए साल पर ये लिखा था, पर जवाब मिले नहीं अभी तक. सवाल बन कुछ इस तरह ज़हन में अटके पड़े हैं : क्या फिर वही होंगे … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , , | टिप्पणी करे

माँ

  कभी सोचा है माँ के काँधे कितने दुखते होंगे, नित नयी जिम्मेदारियों के तले और थोड़ा झुकते होंगे। कितनी उम्मीदें, आशाएं, उपेक्षाएं बाजुओं को खोंचती होंगी, वो दिन में मुसकुराती माँ, रात भर नींद में सिसकती होगी। छू के … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | 2 टिप्पणियाँ

गुज़रा साल और तुम

तेरे आज और कल के दरमियान,
एक सदी गुज़र गयी एक साल मे. पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | 1 टिप्पणी

नीम

थोड़ी कड़वा हो रही हूँ। शायद नीम हो गयी हूँ ! पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

जन्माष्टमी के दिन

जन्माष्टमी के दिन नवशिशु कान्हा को दूध से नहलाते हैं, नये वस्त्र पहनाकर सोलह श्रंृगार किये नयी राधा रानी के संग झूले पर सजाते हैं । झांकियाँ निकलती हैं, ढोल मंजीरों के बीच कान्हा कान्हा की हूंकार से गुज़र हर … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

दो दशक

हम मिले ज़िन्दगी के उस मोड़ पर फिर से,
जहाँ तुम उतने ही साधारण थे जितनी की मैं ,
एक मार्गदर्शक, एक हमसफ़र के चेहरों से छुपे,
अपने आगे अपनो के सुख दुःख को जीते हुए। पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , | टिप्पणी करे

….

कहने को न हो कुछ भी ,वो दिन कुछ ख़ास होते हैं. बयां न कर पाये जो जज़्बात,दिल के पास होते हैं.

कविता में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे