Category Archives: कविता

माँ

  कभी सोचा है माँ के काँधे कितने दुखते होंगे, नित नयी जिम्मेदारियों के तले और थोड़ा झुकते होंगे। कितनी उम्मीदें, आशाएं, उपेक्षाएं बाजुओं को खोंचती होंगी, वो दिन में मुसकुराती माँ, रात भर नींद में सिसकती होगी। छू के … पढना जारी रखे

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गुज़रा साल और तुम

तेरे आज और कल के दरमियान,
एक सदी गुज़र गयी एक साल मे. पढना जारी रखे

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नीम

थोड़ी कड़वा हो रही हूँ। शायद नीम हो गयी हूँ ! पढना जारी रखे

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जन्माष्टमी के दिन

जन्माष्टमी के दिन नवशिशु कान्हा को दूध से नहलाते हैं, नये वस्त्र पहनाकर सोलह श्रंृगार किये नयी राधा रानी के संग झूले पर सजाते हैं । झांकियाँ निकलती हैं, ढोल मंजीरों के बीच कान्हा कान्हा की हूंकार से गुज़र हर … पढना जारी रखे

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दो दशक

हम मिले ज़िन्दगी के उस मोड़ पर फिर से,
जहाँ तुम उतने ही साधारण थे जितनी की मैं ,
एक मार्गदर्शक, एक हमसफ़र के चेहरों से छुपे,
अपने आगे अपनो के सुख दुःख को जीते हुए। पढना जारी रखे

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….

कहने को न हो कुछ भी ,वो दिन कुछ ख़ास होते हैं. बयां न कर पाये जो जज़्बात,दिल के पास होते हैं.

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नया साल

दिन फिर वही होंगे और वही होगी रात, कुछ कच्चे बे-लम्स, कुछ गहरे जज़्बात। हैरान कर जाएगा ज़माना किसी रोज़, चैन ले जाएगा करके किसदिन मधहोश। फिर दिल टूटेंगे ,फिर होगा बेहद मलाल, पर फिर भी मुबारक हो तुमको नया … पढना जारी रखे

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