Author Archives: Gee

About Gee

In Medias Res. A storyteller. Abstract Painter. Resin Jewellery Maker. Swears by Poetry & Fiction. Bitten by travel bug. Writing the bestseller called Life. Candid photographer @ImaGeees. Please mail at artbyygee@gmail.com for commissioned art work or to buy handmade resin jewellery.

वंश वृद्धि

“किस तरह की माँ है ये ?” अखबार को टेबल पर रखते ही मेरे मुँह से आह निकली . नारी जननी से भक्षक कैसे बन सकती है? मेरे मन को ये सवाल लगातार कचोट रहा था। “क्या हुआ बहु जी … पढना जारी रखे

कहानी में प्रकाशित किया गया | 3 टिप्पणियां

पलाश के फूल

पतझड़ बसंत के मौसम में, आसाँ नहीं पलाश फूल होना. पल में आस्मां का सितारा, पल में ज़मीं में धूल होना. पत्तों को अलविदा कहते शाखों का ठूँठ का होना ! बरस हर बरस बहार बन, पाइयों तले मसल मरना। … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

अहम् 

मर गया तो मै नहीं, फ़िर मै का अस्तित्व क्या, तस्वीरों की गुफ़्तगू से बस दीवारें ही सजती हैं!

कविता में प्रकाशित किया गया | टिप्पणी करे

नया साल?

  बरसों से साल की शुरुवात एक कविता लिख कर करती हूँ. पिछले नए साल पर ये लिखा था, पर जवाब मिले नहीं अभी तक. सवाल बन कुछ इस तरह ज़हन में अटके पड़े हैं : क्या फिर वही होंगे … पढना जारी रखे

कविता में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , , | टिप्पणी करे

स्वतंत्रता दिवस -एक लघु कथा

दीपू आज बहुत खुश था .इतना खुश कि ख़ुशी के मारे पूरी रात आँखों ही आँखों में काटी थी, बस कब सुबह हो और उसका ख्वाब पूरा हो! कल १५ अगस्त जो है . बापू ने उसे वादा किया था … पढना जारी रखे

कहानी में प्रकाशित किया गया | Tagged , , , , | 14 टिप्पणियां