माँ

@ImaGeees

कभी सोचा है माँ के काँधे कितने दुखते होंगे,

नित नयी जिम्मेदारियों के तले और थोड़ा झुकते होंगे।
कितनी उम्मीदें, आशाएं, उपेक्षाएं बाजुओं को खोंचती होंगी,

वो दिन में मुसकुराती माँ, रात भर नींद में सिसकती होगी।
छू के करना महसूस कैसे माँ के तकिये में संमदर बसते होंगे,

सूखी एड़ियों की दरारों में सौ दर्द चक्की से दरकते होंगे।
याद रखना जब कभी कहो कि माँ सब सम्हाल लेगी, 

क्या हम सदा पास हैं उसके जो हमेशा हमारा साथ देगी?

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About Gayatri

A storyteller. Poetry, fiction, Travel tales, CSR, Parenting, Images. Writing the bestseller called Life. Communication strategist. Freelance writer. Candid photographer @ImaGeees. I travel, thus I write. I write, therefore I am. Please mail at imageees@gmail.com for writing/photography assignments.
यह प्रविष्टि कविता में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

2 Responses to माँ

  1. Confused Thoughts कहते हैं:

    maa ke upar likhi sari kavitayen anayas hi dil ko sparsh krti hai!
    सूखी एड़ियों की दरारों में सौ दर्द चक्की से दरकते होंगे।
    याद रखना जब कभी कहो कि माँ सब सम्हाल लेगी,

    ye pankti bhavuk kr deti hain !bhut sundar aBHIVYAKTI

    Liked by 1 व्यक्ति

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