नेता जी कहैं

प्रेस  के कैमरों की चुंधियाती रौशनी में,
बंद आँखें एडजस्ट करते नेताजी बोले –

“कम सवाल करना इंसानियत के नाते ,
मन व्यथित है आज, शब्द मौन है सारे। ”

दुखद खबर है फिर सूखा पडा देहात में,
पीने को पानी नहीं, चूल्हे पडे हैं राख में.

अजब हाल है मेरे आंसू फिसल रहे हैं ,
और सीने में धधकते कोयले जल रहे हैं।

दिल करता है कि मैं फांसी चढ़ जाऊं ,
किसानो के दुःख में मरके सोग मनाऊँ । ”

झुकी गर्दन ने ऐसा ज़ोर का बल खाया,
सेक्रेटरी ने लपक झपक के हाथ बढ़ाया।

गिरती टोपी सर्र से सर पे वापिस आई ,
फिर नेताजी ने धीमे से आवाज़ लगायी।

“अरे भाई, ज़रा ये ऐ. सी. यहाँ घुमाना।
पांच सितारा होटल है या गुसलखाना।

पसीने से तर बतर हमारा गहरा बदन है ,
सफ़ेद कुर्ते पर काले पसीने की पहरन है।

कैसे दें सांत्वना लोगों को ऐसे हालात में ,
न आवाज़ में दम है , न चर्बी है आंत में ।

सफ़ेद मांस पर सील लगा दी माई बाप ने,
पर काले भैंसे तो बहुत फिरा करें हैं देहात में.

भारत में भूख सिर्फ इंसान को नहीं डसती,
मुर्दों की बस्ती में जनावर की भी है हस्ती ।

जाइए, नफरत की चिंगारी एक जलाइए,
फिर मिल कर हमरे साथ दावत खाइये।

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About Gayatri

A storyteller. Poetry, fiction, Travel tales, CSR, Parenting, Images. Writing the bestseller called Life. Communication strategist. Freelance writer. Candid photographer @ImaGeees. I travel, thus I write. I write, therefore I am. Please mail at imageees@gmail.com for writing/photography assignments.
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