हरसिन्गार के फ़ूल

ज़िन्दगी रेत के टीलो की गुलाम है अब
जो महकती थी फ़िज़ा मे कभी दुआ बन
कभी हरसिन्गार के फ़ूल सजा तन मन
धूल मे सनी है वादिया ख्वाबो की अब

आन्धिया चलती है बैरागी बन आजकल
तुम नज़र आ कर भी दिखाई नही देते
कानो तक आ रुक जाती है कुछ सदाए
लफ़्ज़ हो जैसे तुम्हारे पर सुनाई नही देते

रेगिस्तान सा बन्जर उदास दिल हो गया है
केक्टस उग आये है सूखे मन की सतह पर
एक रुकी चीख बन के अटक पडे है मिसरे
मन्न को झिन्झोड कहानी बनके नही बहते

तुम ग्यान की एक बून्द बन बरस जाओ न
भूल गयी लिखना आओ फिर सिखलाओ न
अलफ़ बे पे के कसीदे चलो फिर से पड ले
तख्ती साफ़ है ,मिल कर एक कहानी रच ले

सुकून मिले मुझे थोडा,पलको पे नीन्द सजाऊ
मन्न मे उछलते खयालो को कोई लोरी सुनाऊ
वक़्त की आन्धी शायद नाराज़ हो लौट जाये
धूलित अल्फ़ाज़ सावन के पपीहे से चहक जाये

और महक जाये अल्फ़ाज़ से फिर ज़िन्दगी ये मेरी
जी जाऊ और मै एक सदी ओस की बून्द बन कर

Advertisements

About Gayatri

A storyteller. Poetry, fiction, Travel tales, CSR, Parenting, Images. Writing the bestseller called Life. Communication strategist. Freelance writer. Candid photographer @ImaGeees. I travel, thus I write. I write, therefore I am. Please mail at imageees@gmail.com for writing/photography assignments.
यह प्रविष्टि कविता में पोस्ट और , , , , टैग की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

6 Responses to हरसिन्गार के फ़ूल

  1. संजय भास्कर कहते हैं:

    बहुत ही बेहतरीन और प्रशंसनीय प्रस्तुति……!!!!

    Like

  2. sada कहते हैं:

    वाह …बहुत ही बढि़या।

    Like

  3. Dev कहते हैं:

    Awesome ! Kya Baat hai…

    Cactus…. atak pade hain misray… takhti saaf hai….
    so Gulzaarish…. 🙂

    Keep writing. Way to GO !!!

    Like

  4. शिव कहते हैं:

    बहुत पसंद आई कविता.

    Like

  5. Abhinav (@ABHIandNOW) कहते हैं:

    Very beautiful, it’s kind of a poem that you would love to start your day with.

    Like

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s