ज़िन्दगी बहुत सस्ती है ,..

पल चिन्न है,छिन पल है
रोज़ सड़को पे बिकती है
पानी है यहाँ महंगा हुज़ूर
पर ज़िन्दगी बहुत सस्ती है …

चौराहे के खूंटे पे सूखती
कड़ी तराशे सिसकती है
टूटी चूडियों के टुकड़े सहेज
कलाईया कफ़न से लिपटती है

वक़्त बहुत महंगा है हुज़ूर
पर ज़िन्दगी बहुत सस्ती है ….
अखबार की सुर्खियाँ शब् भर
लाल स्याही से चमकती है
सुबह कालिख हर्फो की
दर्द से कराह उठती है …
“कल रात तेज़ दौड़ती गाडी
एक चिराग को बुझा उडी “
रुको, संभल के चलो
ऊँचे नभ में उड़ने वालो
ज़िन्दगी तुम्हारी भी कभी
सडको पे निकलती है ….
क्या अब भी जीने की कीमत
तुम को कम दिखती है ???

 

 

Advertisements

About Gayatri

A storyteller. Poetry, fiction, Travel tales, CSR, Parenting, Images. Writing the bestseller called Life. Communication strategist. Freelance writer. Candid photographer @ImaGeees. I travel, thus I write. I write, therefore I am. Please mail at imageees@gmail.com for writing/photography assignments.
यह प्रविष्टि कविता में पोस्ट और , टैग की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

15 Responses to ज़िन्दगी बहुत सस्ती है ,..

  1. Narendra कहते हैं:

    firdt hindi porm i read entirly..i cant do humor so i know how difficult it is..i cannot do hindi and so i know how tough it is to write somethingin hindi(typing included..)

    all the best for the IB of the month…

    Like

  2. Arpit कहते हैं:


    रुको, संभल के चलो
    ऊँचे नभ में उड़ने वालो
    ज़िन्दगी तुम्हारी भी कभी
    सडको पे निकलती है ….

    Nice One. 🙂

    Like

  3. Prem Farrukhabadi कहते हैं:

    वक़्त बहुत महंगा है हुज़ूर
    पर ज़िन्दगी बहुत सस्ती है
    bahut sahi kaha .

    Like

  4. गायत्री कहते हैं:

    shukriya Vijay ji

    Like

  5. Vijay Kumar Sappatti कहते हैं:

    namaskar..

    bahut der se aapki kavitayen padh raha hoon ..is kavita ne man ko kahin rok sa diya hai .. aap bahut accha likhte hai …aapki kavitao ki bhaavabhivyakti bahut sundar hai ji ..

    वक़्त बहुत महंगा है हुज़ूर
    पर ज़िन्दगी बहुत सस्ती है ….

    ye pankhtiyan apne aap me kuch kahti hai …

    meri badhai sweekar kare,

    dhanyawad.

    vijay
    pls read my new poem :
    http://poemsofvijay.blogspot.com/2009/05/blog-post_18.html

    Like

  6. गायत्री कहते हैं:

    Farazji and Arvindji : shukriya

    Like

  7. ARVI'nd कहते हैं:

    aapne behtarin rachna likhi hai…..aapke shabdo ka chunav bahut hi achha rahta hai…..

    Like

  8. Shamikh Faraz कहते हैं:

    zindagi ko aaina dikhane wali kavita ke lie badhai.bahut khubsurat likha hai aapne.jitni tareef ki jaye kam hai. kabhi mere blog par bhi aayen.
    http://www.salaamzindadili.blogspot.com

    Like

  9. गायत्री कहते हैं:

    aap sab ka shukriya…

    Like

  10. डॉ .अनुराग कहते हैं:

    बड़े दिनों बाद आमद…..पर जिंदगी के लिए आईने के साथ

    Like

  11. विनय कहते हैं:

    बहुत ख़ूब

    Like

  12. कुश कहते हैं:

    यही तो हो रहा है आजकल.. बिलकुल सामयिक लेखन

    Like

  13. raj कहते हैं:

    sahi kaha jeene ki keemat ko pahchanna boht mushkil hai……

    Like

  14. नीरज गोस्वामी कहते हैं:

    आज के आपाधापी भरे जीवन का अच्छा चित्रण किया है आपने अपनी रचना में…बधाई…
    नीरज

    Like

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s