आधे ….अधूरे …

टुकडो में छुआ है तुमको
कभी सुबह की ओस बन कर
कभी लबो पे शोख बन कर …

बन के मदमाती हवा
गुज़रा हूँ गेसुओं से तेरी
और बन के परवाना कभी,
मिला हूँ शमाओं सें कई….

टुकडो में जिया है अब तक
आधे अधूरे ख्वाब बुन कर…..
ले के दिल में आस तेरी
अब से तब तलक ठन कर

जो पा सकू तुझे कभी
तो गुज़र जायेगी इक सदी
कभी ग़मों का शाख बन कर
कभी खुशी का साथ बन कर

न मिल सको गर तुम ..
तो कट जायेगी ज़िन्दगी
कभी फलक की राख बन कर
कभी सेहर की ख़ाक बन कर …..

…..और में हवाओं में घुल कर
लिपट जाऊँगा गेसुओं से तेरी ……

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About Gayatri

A storyteller. Poetry, fiction, Travel tales, CSR, Parenting, Images. Writing the bestseller called Life. Communication strategist. Freelance writer. Candid photographer @ImaGeees. I travel, thus I write. I write, therefore I am. Please mail at imageees@gmail.com for writing/photography assignments.
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17 Responses to आधे ….अधूरे …

  1. मुकेश कुमार तिवारी कहते हैं:

    गायत्री जी,

    खूबसूरत अहसासों को महसूस किया जा सकता है, एक अच्छी रचना।

    सादर,

    मुकेश कुमार तिवारी

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  2. Dr. Tripat कहते हैं:

    टुकडो में जिया है अब तक
    आधे अधूरे ख्वाब बुन कर…..
    kya baat hai…

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  3. गायत्री कहते हैं:

    Dear All :Thank you for your encouraging words.

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  4. raj कहते हैं:

    main hwaao me gul kar lipt jaunga tere gesun se….very toching…yeh adhe adure shabad puree baat kah jaate hai

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  5. Devraj कहते हैं:

    टुकडो में जिया है अब तक
    आधे अधूरे ख्वाब बुन कर…..
    Very nice.
    Keep writing Gayatri…

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  6. Manali Chakravarty कहते हैं:

    khubsurat kalpanaon ka ashcharya melbandhan…likhte rahie di…inspiration milti hai hum e…

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  7. गायत्री कहते हैं:

    मेरे आधे अधूरे शब्दों को कुछ नए मायने देने के लिए आप सब का धन्यवाद .

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  8. कुश कहते हैं:

    कुछ शब्द तो शानदार है..

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  9. रंजना [रंजू भाटिया] कहते हैं:

    टुकडो में जिया है अब तक
    आधे अधूरे ख्वाब बुन कर…..
    ले के दिल में आस तेरी
    अब से तब तलक ठन कर

    बेहतरीन लगी यह पंक्तियाँ सुन्दर अच्छा लिखा है आपने

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  10. अनूप शुक्ल कहते हैं:

    सुन्दर!

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  11. pallavi trivedi कहते हैं:

    bahut achchi lagi….specially last two lines.

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  12. vandana कहते हैं:

    tukdon mein chua hai tumko……….waah kya likh diya aapne……….bahut gahre bhav har pankti mein.

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  13. विनय कहते हैं:

    आख़िरी की पंक्तियाँ बहुत ख़ूबसूरत हैं


    चाँद, बादल और शाम
    गुलाबी कोंपलें

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  14. समयचक्र - महेन्द्र मिश्र कहते हैं:

    बहुत बढ़िया रचना. बधाई

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  15. मुंहफट कहते हैं:

    और में हवाओं में घुल कर
    लिपट जाऊँगा गेसुओं से तेरी
    ….भाव-विह्वला पंक्तियां.

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  16. MANVINDER BHIMBER कहते हैं:

    टुकडो में जिया है अब तक
    आधे अधूरे ख्वाब बुन कर…..
    ले के दिल में आस तेरी
    अब से तब तलक ठन कर
    dil ko chune waali rachna hai

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  17. mehek कहते हैं:

    sundar bhav hai kavita ke,badhai.

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