ख्वाब बड़े और कमरे छोटे……

ख़्वाब संजोया है हमने
छुई मुई सा मद्धम मद्धम
पर देख हकीकत आह भरें
है ख़्वाब बड़े पर कमरे कम………


ख़्वाब बड़े और कमरे छोटे
आसमा पर ग़र कुछ घर होते
बादलों से घर भर लेते
मुट्ठी मे बाँध कर तारो को
घर अपना जग मग कर लेते
हे ख्वाब बड़े और कमरे छोटे …..

आँख बाँध कर सपने सजोंये
पंख पखेरू साथ ले लाये
आस्मां में उड़ भर आए
बहुत खेल ली
लुक्का छुप्पी …….

छोटे छोटे कमरों मे भर
खुशिया बड़ी बड़ी सजाये
सुंदर सरल मनमोहक
अपना इक आशियाँ बसाए ….

***ख्वाब बड़े पर दिल नही छोटे ***

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About Gayatri

A storyteller. Poetry, fiction, Travel tales, CSR, Parenting, Images. Writing the bestseller called Life. Communication strategist. Freelance writer. Candid photographer @ImaGeees. I travel, thus I write. I write, therefore I am. Please mail at imageees@gmail.com for writing/photography assignments.
यह प्रविष्टि कविता में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

6 Responses to ख्वाब बड़े और कमरे छोटे……

  1. गायत्री कहते हैं:

    आप सबकी हौसला अफ़ज़ाहि का शुक्रिया

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  2. कुश एक खूबसूरत ख्याल कहते हैं:

    सुंदर अभिव्यक्ति.. यूही लिखती रहिए..

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  3. बाल किशन कहते हैं:

    ***ख्वाब बड़े पर दिल नही छोटे ***
    वाह क्या कविता है.
    सुंदर.

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  4. राजीव रंजन प्रसाद कहते हैं:

    ख़्वाब संजोया है हमने
    छुई मुई सा मद्धम मद्धम
    पर देख हकीकत आह भरें
    है ख़्वाब बड़े पर कमरे कम………

    वाह!!

    ***राजीव रंजन प्रसाद

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  5. Udan Tashtari कहते हैं:

    बहुत बढ़िया, बधाई.

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  6. DR.ANURAG ARYA कहते हैं:

    बहुत दिनों बाद आयी है पर एक खूबसूरत कविता लेकर….

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