खुद को खुद से मिला कर तो देखो …..

दिल मे दर्द जगा के तो देखो
प्यार की लौ जला के तो देखो
वातानाकूलित हवा से निकल कर
बसंती पवन का मज़ा ले के देखो
बत्तियों की चमचमाती रौशनी से बाहर
सूरज की किरणे सहला कर तो देखों

बहुत हो लिए परेशान औरो की खातिर
आज …..
खुद को खुद से मिला कर तो देखों

तो …….
उदासी तेरी उड़ जायेगी
तनहाई भी ना सतायेगी
बनेगा तू राजा
जहान् का वो पहला
जिसके मन मे होगा
विश्वास इतना
की
दुनिया की सब दौलत मिल जायेगी
जब खुद की खुद से ही बन जायेगी ……..

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लेखक: Gayatri

A dreamer, a wanderer, traveller & explorer, a nomad at heart. Found refuge in poetry and storytelling. Writing the bestseller called Life.Sometimes shares travel tales. I travel thus I write. I write therefore I am.

7 विचार “खुद को खुद से मिला कर तो देखो …..” पर

  1. gayatri.vansh vradhi padhi…I want to ask you that who is responsible?
    dr or society? one can,t blame everytime the dr..bcoz..MTP in 2nd trimester can be done due to several other reasons like conceived during lactatational period.these pt’s sometimes force us.Banning ultrasound
    ,arresting dr..is nt the answer..padhe likhe..metropol..wale log bhi …want to complete the family..unki maansikta kaun badlega?
    What abt predetection of the sex..?
    people who can afford r going for it also…???

  2. @Vikas Ji,
    Optimism is the way of life…live by it and you would find the difference 🙂

    @सुनीता जी, अनूप जी :
    रचना को सराहने के लिए शुक्रिया. आप लोगो की सराहना अच्छा लिखने की प्रेरणा देती है

    @हरीराम जी,उन्मुकत जी :
    आजकल के व्यस्त जीवन में, आदमी की दौड़ भाग केवल प्रस्परदा, दूसरो से ईर्ष्या, तरकी की खोज और अनगिनत कोफ़ी के कप्स में सिमट कर रह जाती है , “ख़ुद को ख़ुद से मिला कर तो देखो” का तात्पर्य है कि आदमी को मर्ग त्रिष्णा के पीछे ना दौड़ कर जीवन की छोटी छोटी ख़ुशियों के पलों को जीना चाहिए…अपनी इच्छाओ और कामनाओ से निकल , आत्मचींतन कर ज़िंदगी बितानी चाहिए…सुख शांति का मार्ग यही तो है को जान लिया तो दुनिया कि प्रशंसा, गिला से क्या लेना -देना…..

  3. बहुत हो लिए परेशान औरो की खातिर
    आज …..
    खुद को खुद से मिला कर तो देखों

    आज फ़िर आपकी रचना बेहद अच्छी लगी…
    लिखते रहिये आप बहुत अच्छा लिखती है…
    मेरी बधाई

    शानू

  4. अच्छी प्रेरणा दी है इस छोटी सी कविता में। जहान् का राजा बनने का सूत्र देने के लिए बहुत धन्यवाद! जरा और स्पष्ट करें “खुद को खुद से” मिलाएँ या “खुद को खुदा से” मिलाकर देखें?

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