मेरे प्रिय

इन बैरागी नैनन का चित्त ना जाने कोई
देख तुम्हे अनदेखा कर दे
ना देखे तो व्याकुल होये……
इन् मदमाते अधरो का
भेद ना जाने कोई
संग तुम हो तो मौन रहे
तुम जाओ तो तेरा नाम जप लोय…..

इन् बैरन कदमो का
राज़ ना जाने कोई
साथ तुम्हारे ना चले,
तुम जाओ तो पीछे होये…..

मन मे बसे तुम सान्वरे
तुम क्यू ये ना समझे
ना मेरी मे हां हे छुपी
क्या तुम समझे
हा, तुम अब समझे…

और अब, मे पूर्ण तेरी हुई प्रिय

Advertisements

About Gayatri

A storyteller. Poetry, fiction, Travel tales, CSR, Parenting, Images. Writing the bestseller called Life. Communication strategist. Freelance writer. Candid photographer @ImaGeees. I travel, thus I write. I write, therefore I am. Please mail at imageees@gmail.com for writing/photography assignments.
यह प्रविष्टि कविता में पोस्ट की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

6 Responses to मेरे प्रिय

  1. Shekhar कहते हैं:

    एक अनोखी अदा है इस कविता में…एक मुलायम एहसास, स्त्रीत्व का नटखटपन, उसके मन की नाज़ुक चपलता और अपने प्रिय द्वारा समझ लिये जाने की आशा और विश्वास साफ़ झलकता है। एक नारी के मन के कोमल रहस्य को खोलती भाव-भीनी रचना पढ़ कर कुछ गुदगुदी सी महसूस हुई।

    वाह जनाब वाह!!!

    Like

  2. Udan Tashtari कहते हैं:

    बधाई इस गहन रचना के लिये.

    Like

  3. गायत्री कहते हैं:

    डिवाइन इडिया जी, परमजीत जी,विकास जी :
    मेरी रचना को सहारने के लिये शुक्रिया

    Like

  4. Divine India कहते हैं:

    भागते मन को भी कोई बंधन चाहिए…मगर मन तो खोजी और तलाश उसकी करता है जिसे वह रम सके।
    बहुत सुंदर रचना!!!

    Like

  5. विकास कुमार कहते हैं:

    सुन्दर रचना

    Like

  6. परमजीत बाली कहते हैं:

    प्रेम के प्रति समर्पण की भावनाओ को दर्शाती एक सुन्दर रचना है। बधाई।

    Like

एक उत्तर दें

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / बदले )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / बदले )

Connecting to %s