वजूद चलते रहना तेरी फितरत में है ये जानती हूँ मैं जानम कबसे फिर भी साया बन चल पड़ती हूँ तेरी बेरुखी की धूप के पीछे पीछे तपिश में झुलस कर रुसवाईयो की तेरी बे इनायती से बेजार हो रही हूँ दिल-ऐ-बेदर्द से शिकवा कर के देखो टूटे अरमानो का बाज़ार बन गयी हूँ कभी [...]
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वजूद
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