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Archive for फ़रवरी 12th, 2012

वजूद चलते रहना तेरी फितरत में है ये जानती हूँ मैं जानम कबसे फिर भी साया बन चल पड़ती हूँ तेरी बेरुखी की धूप के पीछे पीछे तपिश में झुलस कर रुसवाईयो की तेरी बे इनायती से बेजार हो रही हूँ दिल-ऐ-बेदर्द से शिकवा कर के देखो टूटे अरमानो का बाज़ार बन गयी हूँ कभी [...]

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