कितना आगे निकल गया ये शहर कितनी तन्हा मै रह गयी अकेली इन वीरानो मे अपनी परछाईयो से गुफ़्तगू करना भी मुश्किल है अब यादो के साये ताड से लम्बे हो गये और मै घट कर बौनी भर रह गयी
Archive for फ़रवरी, 2012
आदतन् …आदतन …।
Posted in कविता, रिश्ते, tagged hindi, kavita, networked blog, Poetry on फ़रवरी 28, 2012 | Leave a Comment »
कभी मै तेरी आदत से परेशान कभी तेरी आदत मुझसे पशेमान हमारा रिश्ता भी आदतन था न रूठ के बिफ़र गया था उस रात कर गया जान को रूह से जुदा … अनजाने जब कभी जोड देती हू तेरे नाम से अपना नाम आदतन कह देती है रूठी रूह की धडक…। गुमनाम से शहर के [...]
वजूद
Posted in कविता, tagged इंड़ी ब्लागर, कविता, हिन्दी, facebook, hindi, Networked Blogs, Poem, Twitter on फ़रवरी 12, 2012 | 1 Comment »
वजूद चलते रहना तेरी फितरत में है ये जानती हूँ मैं जानम कबसे फिर भी साया बन चल पड़ती हूँ तेरी बेरुखी की धूप के पीछे पीछे तपिश में झुलस कर रुसवाईयो की तेरी बे इनायती से बेजार हो रही हूँ दिल-ऐ-बेदर्द से शिकवा कर के देखो टूटे अरमानो का बाज़ार बन गयी हूँ कभी [...]
