अपने ही शहर मे आये है एक अजनबी की तरह दबे कदमो का बोझा लिये तेरी आहट ने भी पराया कर दिया था यहा हमको तू वो रहनुमा नही जिसे मेरी निगाह तलाशे सदा फिर क्यू दोबारा तेरी ही चौखट पे ला खडा कर रुसवा कर दिया हमको सान्से चलती है अबतक राते देर तक [...]
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एक अजनबी की तरह
Posted in कविता, tagged hindi, networked blog, Poem, Twitter on अगस्त 16, 2011 | 4 Comments »
