तुम्हारे दिल तक जाता हर रस्ता
तन्ग दरीचो से गुज़र निकलता है
कुछ बन्द दरवाज़े दरमिया आते है
खयालो पे हर वक़्त पहरा रह्ता है
उम्मीद की नन्ही किरन का टीका
सहेज सर माथे पे क्या लगा पाओगे
मै उफ़नता ,उमडता प्रेम दरिया हू
तन्ग गलियो मे क्या बसा पाओगे
सब से छुप के गमो की चादर ओडे
बयाबान मे अकेले थे तुम अब तक
डर है तेरे दिल के डूबने उबरने तक
भूलभुलैया मे न खो जाये उदास मन
हज़ार कोने है तेरे दिल की गहराई मे
और तुम सूखी बाओली,अन्धेरी गहरी
