Reposting An Old Poem
यू टर्न
हर क़दम संभल के रखो
हर हरफ़ वज़न कर कहो
कल् क्या पता हो न हो
लाइफ में यू- टर्न नही है …..
हर रिश्ता खुल के जियो
शक को जगह कोई न दो
जो कहना है आज कहो
कल की कोई शाख नही है ……..
नाराज़ हो कर तुम
दायरे समेट तो लो
पर दिल में दरिया रखो
हमदम खुदा तो नही है ……
तोड़ने से पहले कोई दिल
आयने में झाँक तो लो
जो रहता है उस पार वो
इतना भी पाक नही है …
चटक जाए रिश्ता कोई
फिर से जुड़ सकता है
झिर्रिया फिर भी दिखती है
गांठो में साख नही है ……
हर कदम संभल के रखो
हर हरफ वजन कर कहो
हर नाता प्रेम से बाँचो
की रिश्तो में आंच नही है ….
पल भर में बुझते है
सदियों में फ़ना होते है
नाज़ुक होते है बड़े रिश्ते
रिश्तो की शुरुवात यही है …..

Awesomely Amazing Poem!