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Archive for अगस्त, 2011

अपने ही शहर मे आये है एक अजनबी की तरह दबे कदमो का बोझा लिये तेरी आहट ने भी पराया कर दिया था यहा हमको तू वो रहनुमा नही जिसे मेरी निगाह तलाशे सदा फिर क्यू दोबारा तेरी ही चौखट पे ला खडा कर रुसवा कर दिया हमको सान्से चलती है अबतक राते देर तक [...]

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तुम्हारे दिल तक जाता हर रस्ता तन्ग दरीचो से गुज़र निकलता है कुछ बन्द दरवाज़े दरमिया आते है खयालो पे हर वक़्त पहरा रह्ता है उम्मीद की नन्ही किरन का टीका सहेज सर माथे पे क्या लगा पाओगे मै उफ़नता ,उमडता प्रेम दरिया हू तन्ग गलियो मे क्या बसा पाओगे सब से छुप के गमो [...]

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यू टर्न

Reposting An Old Poem यू टर्न हर क़दम संभल के रखो हर हरफ़ वज़न कर कहो कल् क्या पता हो न हो लाइफ में यू- टर्न नही है ….. हर रिश्ता खुल के जियो शक को जगह कोई न दो जो कहना है आज कहो कल की कोई शाख नही है …….. नाराज़ हो कर [...]

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